1.PM Modi in Chhattisgarh: The Prime Minister inaugurated a new Legislative Assembly building in Nava Raipur, unveiled a statue of former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee, and stated that the government’s development is guided by the mantra that the development of states leads to the development of the nation. During his visit, he also said that Maoist influence has been significantly reduced.
2.Government scheme launched: Labour and Employment Minister Dr. Mansukh Mandaviya launched the “Employee’s Enrolment Scheme 2025” to expand EPF coverage and social security for eligible employees left out between July 1, 2017, and October 31, 2025.
3.Digital Census trial run: A trial run for the first digital Census in independent India is set to begin. The self-enumeration module is being tested by enumerators before the full Population Census 2027.
4.Bihar Assembly elections: Campaigning for the first phase of the Bihar Assembly elections continued, with heavy rain reportedly disrupting some campaigning efforts. Samajwadi Party president Akhilesh Yadav also began his campaign tour to support INDIA bloc candidates.
5.Sikh pilgrims were granted visas to travel to Pakistan after the Centre reversed its ban.
6.Defence Minister Rajnath Singh, at a meeting in Kuala Lumpur, said the Indo-Pacific should remain free from coercion.
7.Several states, including Karnataka, Kerala, and Haryana, celebrated their foundation days.
8.Senior Shiv Sena (UBT) leader Sanjay Raut announced a temporary break from politics due to a health issue, prompting well wishes from PM Modi.
1. प्रधानमंत्री मोदी का छत्तीसगढ़ दौरा: विकास के नए आयाम और माओवाद पर अंकुश
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज एक ऐतिहासिक दिन देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवा रायपुर में राज्य के नए विधानसभा भवन का लोकार्पण किया। यह भवन न केवल आधुनिक वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोकतांत्रिक विरासत को मजबूती प्रदान करने वाला एक स्तंभ भी है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों का विकास ही राष्ट्र के विकास की नींव है और उनकी सरकार इसी मंत्र से काम कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब छत्तीसगढ़ जैसे संसाधन संपन्न राज्य तरक्की की नई इबारत लिखेंगे, तो देश की प्रगति की गति स्वतः ही तेज हो जाएगी।
इस कार्यक्रम का एक और भावुक कर देने वाला पल तब देखने को मिला, जब प्रधानमोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की एक प्रतिमा का अनावरण किया। अटल जी की यह प्रतिमा न केवल उनके व्यक्तित्व की याद दिलाती है, बल्कि उनके द्वारा स्थापित साझी संस्कृति और राष्ट्रवाद के मूल्यों को भी अमर बनाए रखेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन और दर्शन आज भी हम सभी के लिए मार्गदर्शक का काम करता है।
इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सुरक्षा की दृष्टि से चर्चित मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में माओवादी प्रभाव में उल्लेखनीय कमी आई है। यह बयान न सिर्फ सुरक्षा बलों की कठिन परिश्रम और बलिदान की सफलता को दर्शाता है, बल्कि राज्य के उन इलाकों में विकास और शांति की नई उम्मीद भी जगाता है, जो दशकों से इस हिंसक विचारधारा की चपेट में थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है – विकास और सुरक्षा दोनों पर समान रूप से ध्यान देना। माओवाद के खिलाफ यह सफलता न केवल कानून व्यवस्था में सुधार का संकेत है, बल्कि अब इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे विकास के कार्यों को गति मिलने की भी उम्मीद जगाती है। यह दौरा वास्तव में छत्तीसगढ़ के नए भविष्य की नींव रखने वाला साबित हुआ है।
2. श्रमिक कल्याण की नई इबारत: ‘कर्मचारी नामांकन योजना 2025’ का शुभारंभ
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना की शुरुआत की है। इस योजना का नाम है – ‘कर्मचारी नामांकन योजना 2025’। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन सभी पात्र कर्मचारियों को एपीएफ (ईपीएफ) यानी कर्मचारी भविष्य निधि का लाभ और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना है, जो किसी कारणवश 1 जुलाई, 2017 से 31 अक्टूबर, 2025 के बीच इसके दायरे से बाहर रह गए थे। यह कदम असंगठित और संगठित दोनों ही क्षेत्रों के श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और स्थिरता लाने की दिशा में एक मजबूत पहल साबित होगा।
ईपीएफओ भारत में श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा संस्थाओं में से एक है, जो न केवल सेवानिवृत्ति के बाद की वित्तीय सहायता सुनिश्चित करती है, बल्कि बीमारी, विवाह, शिक्षा आदि जरूरतों के लिए भी अग्रिम राशि उपलब्ध कराती है। इस योजना के तहत, जो कर्मचारी इस अवधि के दौरान कवर नहीं किए जा सके, उन्हें एक विशेष अवसर दिया जाएगा, ताकि वे इस लाभकारी योजना का हिस्सा बन सकें। इससे न केवल उनके भविष्य को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनके परिवार का कल्याण भी सुनिश्चित हो सकेगा।
डॉ. मंडाविया ने इस योजना को ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह देश के हर श्रमिक तक सामाजिक सुरक्षा के लाभ पहुंचाए। यह योजना विशेष रूप से उन युवाओं और कर्मचारियों के लिए वरदान साबित होगी, जो छोटे-मोटे उद्योगों या प्रतिष्ठानों में काम करते हैं और तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से ईपीएफ के दायरे में नहीं आ पाते थे। इससे उन्हें एक तरह की वित्तीय सुरक्षा कवच मिलेगा और वे निश्चिंत होकर अपना काम कर सकेंगे। निस्संदेह, ‘कर्मचारी नामांकन योजना 2025’ देश के श्रमिक वर्ग को सशक्त बनाने और उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।
3. इतिहास के नए दौर में कदम: स्वतंत्र भारत की पहली डिजिटल जनगणना का ट्रायल रन
भारत जनगणना के क्षेत्र में एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है। आजाद भारत की यह पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इसी कड़ी में, जनगणना 2027 से पहले डिजिटल जनगणना का ट्रायल रन यानी परीक्षण अभ्यास शुरू होने वाला है। इस ट्रायल रन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है ‘स्व-गणना मॉड्यूल’ का परीक्षण। इस मॉड्यूल के जरिए लोगों को यह सुविधा मिलेगी कि वे अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर की मदद से स्वयं अपना डेटा सीधे सरकार के सुरक्षित पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे।
इस ट्रायल रन में गणनाकार (एन्यूमरेटर्स) इसी स्व-गणना मॉड्यूल का परीक्षण करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आम नागरिकों के लिए इस प्रक्रिया को समझना और इस्तेमाल करना कितना आसान है और इसमें किसी तरह की तकनीकी दिक्कत तो नहीं आ रही। इस डिजिटल पहल के कई फायदे हैं। पहला, यह प्रक्रिया अब पेपरलेस होगी, जिससे कागज की बर्बादी पर रोक लगेगी और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। दूसरा, डेटा का संग्रहण और विश्लेषण तेजी से और अधिक सटीकता के साथ हो सकेगा। तीसरा, इससे डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता भी बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सकेगी।
जनगणना किसी भी देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक गतिविधियों में से एक है, क्योंकि इसके आंकड़े ही योजना बनाने, संसाधनों का आवंटन और नीति निर्धारण का आधार होते हैं। एक डिजिटल जनगणना न केवल इन आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय बनाएगी, बल्कि इसकी रिपोर्ट्स भी तेजी से तैयार हो सकेंगी। इस ट्रायल रन का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में आने वाली संभावित चुनौतियों को पहले ही दूर करना है, ताकि 2027 में होने वाली वास्तविक जनगणना सहज, सुगम और पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके। यह डिजिटल परिवर्तन निश्चित रूप से भारत की तकनीकी उन्नति का एक और स्वर्णिम अध्याय साबित होगा।
4. बिहार विधानसभा चुनाव: बारिश के बीच जारी है चुनावी रण, अखिलेश यादव ने शुरू किया दौरा
बिहार की राजनीतिक रंगस्थली में इन दिनों चुनावी गर्मी अपने चरम पर है। राज्य में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार जोर-शोर से जारी है। हालांकि, इस बार मौसम ने भी राजनीति में दखलअंदाजी की है। राज्य के कई हिस्सों में हुई भारी बारिश ने चुनाव प्रचार की रफ्तार पर कुछ असर डाला है और कई रैलियों तथा सार्वजनिक सभाओं को प्रभावित किया है। लेकिन, बारिश की यह बौछारें राजनीतिक दलों के जोश को ठंडा नहीं कर पाई हैं और सभी दल मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
इस बीच, समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बिहार की सियासी रणभूमि में कदम रख दिया है। उन्होंने इंडिया गठबंधन (INDIA bloc) के उम्मीदवारों के समर्थन में अपना चुनावी दौरा शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव का बिहार में प्रवेश इस चुनाव का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू माना जा रहा है, क्योंकि इंडिया गठबंधन की तरफ से एक बड़े नेता का चुनाव प्रचार में सक्रिय होना गठबंधन की रणनीति का एक हिस्सा लग रहा है। अखिलेश यादव अपने भाषणों में सत्तारूढ़ दलों पर किसानों, युवाओं और महिलाओं के मुद्दों को हल न कर पाने का आरोप लगा रहे हैं और गठबंधन के एजेंडे को मतदाताओं के सामने रख रहे हैं।
बिहार का यह चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद होने वाला एक बड़ा राज्य चुनाव है और इसे अगले आम चुनावों के मूड का संकेतक भी माना जा रहा है। सभी दल अपनी-अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। भारी बारिश के बावजूद, नेताओं की सभाएं जारी हैं, दरवाजे-दरवाजे जाकर मतदाताओं से संपर्क किया जा रहा है और सोशल मीडिया के जरिए भी चुनावी मैसेजिंग का दौर चल रहा है। ऐसा लग रहा है कि बिहार की जनता इस बार भी अपना फैसला विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर ही आधारित करेगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदान के दिन मौसम कैसा रहता है और बारिश का असर मतदान प्रतिशत पर पड़ता है या नहीं।
5. सिख तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान जाने की अनुमति, केंद्र सरकार ने प्रतिबंध हटाया
केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सिख तीर्थयात्रियों के लिए पाकिस्तान जाने पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है। इस फैसले के बाद सिख समुदाय के श्रद्धालु अब पाकिस्तान स्थित अपने पवित्र धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से पंजाब प्रांत के करतारपुर साहिब, की यात्रा कर सकेंगे। करतारपुर साहिब सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का निवास स्थान रहा है और यह सिख समुदाय के लिए अत्यंत श्रद्धा का केंद्र है। इसके अलावा अन्य गुरुद्वारों की यात्रा के लिए भी वीजा मिल सकेंगे।
यह फैसला दोनों पड़ोसी देशों के बीच लोगों से लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। भारत सरकार ने यह कदम सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं और तीर्थयात्रा की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उठाया है। हालांकि, यह फैसला कुछ शर्तों के साथ आया है और सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए।
इससे पहले, द्विपक्षीय संबंधों में तनाव के चलते इन यात्राओं पर रोक लगाई गई थी। इस प्रतिबंध को हटाने को एक मानवीय और धार्मिक दृष्टिकोण वाला फैसला माना जा रहा है। सिख समुदाय ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे एक अच्छी शुरुआत बताया है। उनका कहना है कि धर्म और आस्था की भावनाएं राजनीतिक सीमाओं से ऊपर होती हैं और ऐसे कदमों से दोनों देशों के बीच सौहार्द बढ़ाने में मदद मिलती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है और देखना यह होगा कि क्या इससे भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों में और सुधार के रास्ते खुलते हैं। फिलहाल, यह फैसला सिख श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।
6. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का मलेशिया में बयान: ‘इंडो-पैसिफिक जबरदस्ती से मुक्त रहना चाहिए’
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) को किसी भी तरह की जबरदस्ती से मुक्त रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र चाहता है, जहां सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाए। यह बयान वैश्विक भू-राजनीति के मौजूदा परिदृश्य में काफी महत्व रखता है, क्योंकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन गया है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की विदेश नीति का मूल मंत्र ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी ‘पूरी दुनिया एक परिवार है’ की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपने हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि वह पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए भी काम कर रहा है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, आपसी विश्वास बढ़ाने और आपसी हित के मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। यह बयान उस समय आया है, जब दुनिया के कई बड़े देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं और चीन के बढ़ते दबाव को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
रक्षा मंत्री का यह बयान भारत की उस स्पष्ट और दृढ़ विदेश नीति को दर्शाता है, जिसमें क्षेत्र में शांति और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। भारत लगातार इस बात की वकालत करता आया है कि किसी भी देश को दूसरे देशों पर अपनी शक्ति थोपने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। राजनाथ सिंह के इस संदेश का उद्देश्य क्षेत्र के अन्य देशों के साथ मिलकर एक ऐसा माहौल बनाना है, जहां व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बिना किसी डर के फल-फूल सके। यह बयान निश्चित रूप से भारत की एक जिम्मेदार regional power की भूमिका को रेखांकित करता है।
7. कर्नाटक, केरल और हरियाणा समेत कई राज्यों ने मनाया अपना स्थापना दिवस
आज का दिन देश के कई राज्यों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि आज कर्नाटक, केरल और हरियाणा समेत कई राज्यों ने अपना स्थापना दिवस मनाया। यह दिन इन राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक महत्व और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद करने का अवसर प्रदान करता है।
कर्नाटक ने आज ‘कर्नाटक राज्योत्सव’ मनाया। इस राज्य का गठन 1 नवंबर, 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के तहत किया गया था। कन्नड़ भाषा और संस्कृति के संरक्षण और विकास के लिए इस दिन का विशेष महत्व है। राज्य में इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, झांकियां और सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए गए।
केरल ने भी आज ही के दिन 1956 में ‘केरल दिवस’ या ‘केरल प्रदेश दिवस’ मनाया। मलयालम भाषी लोगों के लिए एक अलग राज्य के गठन की मांग को स्वीकार करते हुए त्रावणकोर-कोचीन राज्य और मद्रास प्रेसीडेंसी के मलयालम भाषी जिलों को मिलाकर केरल का निर्माण किया गया था। केरल ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में देश को एक नई दिशा दिखाई है और इस दिन उन उपलब्धियों का जश्न मनाया जाता है।
हरियाणा ने भी आज ही के दिन 1966 में पंजाब राज्य से अलग होकर एक स्वतंत्र राज्य का दर्जा प्राप्त किया था। हरियाणा दिवस पर राज्य की कृषि, खेल और औद्योगिक उन्नति को याद किया जाता है। हरियाणा ने देश को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं और देश की अन्न की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है।
इन राज्यों के स्थापना दिवस हमें यह याद दिलाते हैं कि भारत की ताकत उसकी विविधता और एकता में निहित है। हर राज्य की अपनी एक独特 पहचान और इतिहास है, लेकिन सभी मिलकर एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं। यह दिन राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने का भी प्रतीक है।
8. शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने स्वास्थ्य कारणों से राजनीति से लिया अस्थायी विराम
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि वह एक स्वास्थ्य समस्या के चलते अस्थायी रूप से राजनीति से विराम लेंगे। संजय राउत महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रमुख और मुखर चेहरे रहे हैं और उनके इस फैसले ने राजनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह विराम केवल अस्थायी है और जैसे ही वह पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे, वह फिर से सक्रिय राजनीति में लौट आएंगे।
इस खबर के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज राजनेताओं ने संजय राउत के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विटर के जरिए उनके स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की और कहा कि उनका शीघ्र स्वस्थ होना महत्वपूर्ण है। यह भावना राजनीतिक विरोधियों के बीच भी देखने को मिली, जो इस बात का प्रमाण है कि मानवीय संबंध और स्वास्थ्य राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होते हैं।
संजय राउत ने शिवसेना में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वह पार्टी के प्रवक्ता के तौर पर जाने जाते हैं। उनकी अनुपस्थिति पार्टी के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय ला सकती है, खासकर ऐसे समय में जब महाराष्ट्र की राजनीति में कई उठा-पटक चल रही है। हालांकि, उनके अस्थायी विराम ने यह भी संदेश दिया है कि सेहत सबसे पहले आती है और किसी भी व्यक्ति के लिए अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना कितना जरूरी है। पूरे देश की ओर से संजय राउत जी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की जा रही है, ताकि वह फिर से अपनी ऊर्जा और जोश के साथ जनसेवा के कार्यों में जुट सकें।
आपका हार्दिक धन्यवाद !
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– [The Samachaar Team]
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